translation

नेशनल बुक ट्रस्ट वर्ल्ड बुक फेयर 2018


बहुत आशास्पद नहीं रहा

इर्द-गिर्द जारी कन्स्ट्रक्शन प्रवृत्तियां और बंद किये गये प्रवेशद्वारों का असर पड़ सकता है, फेयर के मुलाकाती की संख्या पर। इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ सकता है हॉल नंबर 12 के स्टोल धारकों पर

संजय वि. शाह

दिन 01 – शनिवार 06 जनवरी, 2018  

तो, नयी दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर (WBF) आज से शुरु हो गया। नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित और लेखन, मुद्रण तथा प्रकाशन के उद्योग से जुड़े अनेक व्यापारियों की साझेदारी वाला नयी दिल्ली WBF अपने आप में एशिया का सबसे बड़ा इवेन्ट है। स्वाभाविक है कि इसमें न सिर्फ दिल्लीवासियो बल्कि पूरे देश और दुनिया के लोग उमड़ते हैं। इस साल इसकी तारीख 06-14 जनवरी, 2018 है। तो, क्या माजरा रहा इसके पहले दिन का – सामान्य तौर पर एक बात तो कोई भी चाहेगा कि अपने वफादार विजिटर्स की वजह से WBF 2018 बहुत ही सफल रहा। फिर भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जो चिंता का कारण बन सकते हैं।

पहली बात ये है कि पिछले साल के विपरीत इस साल WBF काफी कम पोल्स में फैला हुआ है। प्रगति मैदान में चल रही कन्स्ट्रक्शन प्रवृत्तियों के कारण इसके हॉल नंबर 01 से 06 और 13 से 18 इस साल WBF में शामिल नहीं है। इतना काफी नही था शायद, प्रगति मैदान में प्रवेश के लिये सिर्फ दो ही गेट उपलब्ध हैं, गेट नंबर 01 और गेट नंबर 10। अब, ये एक चिंताजनक बात है। औऱ आज तो वो फ्री शटल बस सेवा भी उपलब्ध नही थी, जिसकी जरूरत प्रगति मैदान को आने वाले लोगों को बेहद पड़ती है। इसके कारण पहले दिन की भीड़ उम्मीद और पिछले साल की तुलना में काफी कम रही विशेष कर हॉल नंबर 12 में जहां मांगरोल मल्टीमीडिया का स्टॉल है।

हॉल नंबर 12 प्रगति मैदान के एक अंतिम छोर पर है। इस साल के WBF के लेआउट में वो उनके लिये आखरी हॉल बन जाता है जो फेयर में गेट नंबर 10 से प्रवेश करते हैं। जो लोग गेट नंबर 01 से आते हैं, उनके लिये वो पहला हॉल तो होता है, लेकिन फिर, ठीक सामने हॉल 11 भी पड़ता है। पहले दिन हॉल नंबर 12 में जिस तरह कम भीड़ रही वो बेहद बुरा रहा। शनिवार होने के बावजूद ये हाल था और वो भी पूरे हॉल में। जब हम दूसरे हॉल में घूमने गये तो हमने पाया कि वहां हॉल नंबर 12 की अपेक्षा लोगों का बेहतर जमावड़ा था।

हॉल नंबर 12 मुख्य रूप से हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिये है। हमारा ऐसा अनुभव रहा है कि इस हॉल में अन्य हॉल की तुलना में भीड़ कुछ कम ही होती है। कारण इतना ही हो सकता है कि ज्यादातर वाचकों की पसंद की भाषा अंग्रेजी होती चली है। इस हालात में यह बेहतर ही माना जाएगा कि नेशनल बुक ट्रस्ट भारतीय भाषाओं के हॉल का प्लेसमेन्ट अन्य हॉल्स के ठीक बीच में, कुछ इस तरह करने की सोचें कि उसे तमाम हॉल में आने वाले लोगों को आकर्षित करने का अवसर प्राप्त हो। उससे वो कईं लोग इसकी मुलाकात लेंगे जो जाने-अन्जाने में उसे टाल देते हैं।

एक और छोटी पर महत्त्वपूर्ण बात। प्रगति मैदान में पहले जो कार्यरत था वो फूड कोर्ट अब धव्स्त कर दिया गया है। इसलिये अब सारे फूड स्टॉल्स को हॉल 12 के बाहर, ठीक उससे पहले जगह दी गयी है। इससे क्या होता है कि जो लोग अन्य हॉल्स की मुलाकात लेते-लेते हॉल 12 के करीब पहुंचते हैं, और थकान के साथ क्षुधा से भी परेशान होते हैं, वो फूड स्टॉल्स देखते ही पेट- पूजा के लिये आतुर हो जाते हैं। दिल्ली की कड़कड़ाती सर्दी में खाने की लालच को टालना भी मुश्किल है। एक बार यदि कोई खा ले, तो फिर उसके लिये अधिक घूमना और किताबों की दुनिया में फिर एक बार खो जाना आसान नहीं होता।

सरल शब्दों में कहे तो, हॉल नंबर 12 के लिये आने वाले दिन शायद थोड़ी कठिनाइयों वाले रहेंगे, सिवाय इसके कि मैं गलत साबित हो जाऊं।, मैं इस मामले में गलत ही साबित होना चाहूंगा किंतु...

NBT WBF 2018: दिन 01 की झलकियां –

  • 09 दिवसीय इस इवेन्ट में इस साल स्टॉल्स के भाड़े शायद इसलिये ज्यादा हैं कि हॉल्स की संख्या कम है।
  • पिछले साल तक दिये जाने वाले स्टैंडिंग स्टॉल्स की जगह इस साल 02x02 के स्टॉल्स ने ले ली है।
  • प्रगति मैदान में जारी कन्स्ट्रक्शन के विभिन्न कार्य की वजह से इवेन्ट के लिये प्रवेश सिर्फ दो ही गेट से संभव है। स्टॉल धारकों तथा विजिटर्स के लिये भी ये बुरी खबर है।
  • हॉल नंबर 12 के ठीक बाहर लगाये गये हैं फूड स्टॉल्स। सो, गेट नंबर 10 से जो लोग फेयर में आते हैं, वे भोजन के लिये हॉल नंबर 12 की उपेक्षा कर बैठते हैं। इसी तरह, जो लोग गेट नंबर 01 से फेयर में आते हैं वो आम तौर पर शुरुआत करते हैं हॉल नंबर 11 से। वहां से उनकी एक्जिट होने पर वे पहुंच जाते हैं अन्य हॉल्स के करीब और मिस कर बेठते हैं हॉल नंबर 12 को।
  • हॉल के लिये काफी अच्छा भाड़ा चुकाने के बावजूद भी स्टॉल धारकों को निशुल्क इन्टरनेट प्रदान किया जा रहा है और फिर हॉल में हमने जियो, एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के कनेक्शन्स चलाने की कोशिश की, जिसमें से एक में भी हमें सामान्य कनेक्टिविटी तक न मिल पायी।
  • हमें जो एक बात बेहद अजीब लगी वो ये थी कि इस साल स्टॉल धारकों की किट में से कॉफी मग की कटौती की गयी है, जो पिछले साल तक दिया जाता था। हमें स्टॉल पर जो कूड़ादान दिया जाना चाहिए वो भी शाम तक पहुंचा नहीं था।
  • इस डिजिटल वर्ल्ड में WBF को प्रमोट करने के और लोगों को आकर्षित करने के लिये कईं मौलिक चीजें की जा सकती हैं, जिससे वे आने के बाद इवेन्ट में सराबोर रहें और अधिकतम समय भी बिताएं। अचरज है कि ऐसा करने के बारे में नेशनल बुक ट्रस्ट क्यू नहीं सोचता।

(संजय वि. शाह मांगरोल मल्टीमीडिया के संस्थापक-सीईओ हैं)  

Comments