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अनुवाद, तकनीक, बदलाव


अनुवाद, तकनीक, बदलाव
विश्व पुस्तक मेला 2018 के छठवें दिन मांगरोल मल्टीमीडिया के स्टाल पर कुछ आदरणीय और गुणवान आगंतुक पधारे। उन्होंने न सिर्फ कार्य और प्रयत्नों को लेकर चर्चा की बल्कि तकनीक और इस बारे में विचार- विमर्श किया कि लेखन एवं अनुवाद-कला में बदलाव के साथ-साथ स्वयं तकनीक भी आगे चलकर किस कदर बदल जाएगी ।

एनबीटी विश्व पुस्तक मेला 2018 ब्लॉग: छठवां दिन- गुरुवार, 11 जनवरी, 2018
संजय वी शाह की कलम से
“तो अनुवाद करने के लिए आप कितने पैसे लेते हैं ? हमारे पास पर्यावरण के बारे में लिखी गई एक पुस्तक है, जिसका अनुवाद हम अंग्रेजी से अन्य भारतीय भाषाओं में कराना चाहते हैं।” प्रश्नकर्ता मीडिया से जुड़ा व्यक्ति था और साधारणतया मीडिया इंडस्ट्री की ठीक-ठाक समझ रखता था। इस प्रश्न का सामना हमें अक्सर करना पड़ता है; खास तौर पर नए ग्राहकों या ऐसे व्यक्तियों के द्वारा, जो पहली- पहली बार अनुवाद करवाने निकलते हैं। हमने उसे विस्तारपूर्वक समझाया कि अनुवाद के मामले में हम किस तरह से काम लेते हैं:
1. हम दी गई फाइल की विधा, विषय, शैली, शब्द-संख्या और फाइल से संबंधित अन्य चीजों को लेकर उसका मूल्यांकन करते हैं।
2. हम समयसीमा, किसी विशेष अपेक्षा और काम की मात्रा के बारे में एक-एक जानकारी लेते हैं।
3. अधिकतर अनुवाद कार्य के लिए हमारी दरें निर्धारित हैं, जैसे कि सामान्य अनुवाद, कानूनी, विज्ञान-संबंधी अनुवाद कार्य आदि और आम तौर पर हम एकदम उपयुक्त दरों पर काम करते हैं। दरें तभी बदली जाती हैं, जब कोई उचित कारण हो। मिसाल के तौर पर, विषय-वस्तु की जटिलता अथवा अत्यावश्यकता दरों में मामूली वृद्धि का कारण बन सकती है, वहीं काम की अधिक मात्रा दरों को काफी हद तक नीचे भी ला सकती है।
4. कई एजेंसियों अथवा स्वाबलंबन से घर पर बैठ कर काम करने वाले स्वतंत्र अनुवादकों, जिनके पास संशोधन करने और दोबारा नजर डालने की सुविधा नहीं होती, इससे भिन्न हमारे पास अनुवाद की गुणवत्ता जांचने वाली समूची प्रणाली मौजूद है। यद्यपि संशोधन का खर्च हमारी ही जेब से लगता है, लेकिन इससे हमें बहुत बेहतर उत्पाद देने में मदद मिलती है। इस बात को हमारे ग्राहक भी भली-भांति समझते हैं, क्योंकि हमारे इस कदम से वे भी उत्कृष्ट परिणाम मिलने के प्रति निश्चिंत रहते हैं।
बस यह इतनी ही सरल, पारदर्शी और स्पष्ट बात है। आगंतुक को हमने यही बात विस्तारपूर्वक समझा दी। जाहिर तौर पर वह बेहद प्रसन्न व संतुष्ट हुआ और बोला, “विश्व पुस्तक मेले में अब तक मैं पहले ही 40 से ज्यादा स्टालों के चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन अनुवाद के बारे में मुझे इतने कारगर ढंग से किसी ने नहीं समझाया, जैसा कि यहां बताया गया। धन्यवाद!” अहा! आपको यह सब समझाकर हमें भी बड़ी खुशी हुई दोस्त!
आज हमारे स्टाल पर एक तकनीक कंपनी की टीम भी आई थी। वे जानना चाहते थे कि हम कोई विशाल प्रोजेक्ट भी संभाल सकते हैं या नहीं। क्यों नहीं? हमारे पास दुनिया भर में 600 से अधिक सहयोगियों का नेटवर्क मौजूद है। हम 40 भाषाओं में काम करते हैं और 400 से ज्यादा ग्राहकों की जरूरतें पूरी करते हैं।

इसके अलावा हमारे पास एक ऐसा आरोही मॉडल है, जिसमें किसी भी विशाल प्रोजेक्ट को निर्बाध रूप से समाहित किया जा सकता है।
गुरुवार हमारे लिए भारी चहल-पहल भरा और बेहद व्यस्त दिन साबित हुआ। घर बैठ कर काम करने के इच्छुक कई आगंतुक भी आए। हमने उन्हें मांगरोल मल्टीमीडिया का परिचय देते हुए जानकारी दी कि हमारी कार्यप्रणाली कैसी है वगैरह...
हमने अपने हाल क्रमांक 12 के बाहर आज ढेर सारे पत्रक वितरित किए। हमारी टीम का एक व्यक्ति प्रगति मैदान में लगे डब्ल्यूबीएफ 2018 के प्रत्येक स्टाल मालिक को भी पत्रक पहुंचा कर आया।
और अंत में हम आकांक्षी अनुवादकों को कुछ सुझाव देना चाहेंगे:

  •  मात्र सामान्य अनुवादक बन कर रह जाने की कामना न करें, बल्कि सक्रिय रूप से खुद को एक भरोसेमंद अनुवादक बनाने की तैयारी शुरू करें।
  •  खूब पढ़ें। रोजाना कुछ न कुछ अनुवाद करते रहें, चाहे आपको भुगतान वाला काम मिले या मात्र अभ्यास का।
  •  इस गफलत में कभी न रहें कि कोई पेशेवर काम मिलने की सूरत में आप बड़ी आसानी से अनुवाद के साथ न्याय कर सकेंगे। एक बेहतर पेशेवर अनुवादक बनने हेतु आपको प्रतिदिन शब्दों के साथ खेलते रहना होगा।
  •  जिन भाषाओं में आप काम करते हैं, उन्हें टाइप करना सीखें। यह कठिन नहीं है।
  •  व्याकरण पर अधिकतम ध्यान दें और इसे सीखना जारी रखें।
  •  किसी भी अच्छे गायक को रियाज की जरूरत होती है और बेहतर क्रिकेटर बनने के लिए आवश्यक रूप से नेट-प्रैक्टिस करनी पड़ती है। इस अभ्यास को जितना नियमित रूप से किया जाए, उतना बेहतर! इसी प्रकार अच्छे अनुवादक को भी ऐसी ही आदतें डालनी चाहिए। सतत विकास करने के लिए पढ़ना, लिखना, सीखना, शब्दों के साथ नए-नए प्रयोग करना, साथियों और अनुभवी पेशेवरों से चर्चा करके संदेहों का निराकरण करना किसी भी अनुवादक के लिए नियामत हैं।

ठीक! लेकिन बात अभी पूरी नहीं हुई। बहरहाल, यदि आप डब्ल्यूबीएफ 2018 में लगे मांगरोल मल्टीमीडिया के स्टाल पर अब तक नहीं आए तो कृपया अवश्य पधारें! आपका स्वागत करके हमें प्रसन्नता होगी। हमारा ठिकाना है: हाल 12, स्टाल 151

(संजय वी शाह मांगरोल मल्टीमीडिया के संस्थापक-सीईओ हैं)

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